जेडीयू के सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता संकट में पड़ सकती है। इस मामले को लेकर जेडीयू के ही नेता दिलेश्वर कामैत ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि गिरधारी यादव पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं और उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला
मामला एसआईआर (Special Summary Revision) को लेकर गिरधारी यादव के बयान का है। सांसद यादव ने हाल ही में कहा था कि अगर लोकसभा चुनाव के समय वोटर लिस्ट सही थी, तो कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए यह गलत कैसे हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा और कहा कि सांसद के रूप में उन्होंने गलत वोटर लिस्ट पर जीत हासिल नहीं की है। गिरधारी यादव ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग ने इस प्रक्रिया को ऐसे समय में करवा दिया, जब पूरा प्रदेश बाढ़ जैसी स्थिति से परेशान है। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया छह महीने पहले ही पूरी हो जानी चाहिए थी।
पार्टी का कारण बताओ नोटिस
सांसद के इस बयान को देखते हुए जेडीयू ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा। पार्टी ने इसे अनुशासन का उल्लंघन बताया और जवाब न देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। जेडीयू ने हमेशा चुनाव आयोग का समर्थन किया है और प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के पक्ष में रही है। इसी वजह से पार्टी ने सांसद को नोटिस जारी किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
बीते विधानसभा चुनाव के दौरान सांसद गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश ने बेलहर विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जेडीयू ने इस सीट से मनोज यादव को अपना उम्मीदवार बनाया था।
इस घटना ने जेडीयू और सांसद गिरधारी यादव के बीच खाई को उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि लोकसभा अध्यक्ष नोटिस पर क्या कार्रवाई करते हैं और सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।
