पटना: ईरान, इजराइल और के बीच जारी तनाव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। राजधानी पटना सहित बिहार के कई वास्तुशिल्प मंदिरों में भारी मात्रा में दुकानें हो गई हैं। गैस कंपनियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, फिर भी योजना नहीं मिल पा रही है।

राजीव नगर के सैटेलाइट पिछले महीने से गैस के लिए चिंता का विषय है। उनकी दोनों पार्टियां बेकार हो गई हैं, जिसकी वजह से अब परिवार लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर है। साइंट का कहना है कि उन्हें विक्रय स्टोर का संदेश मिला, लेकिन ‍मंच पर गैस तक नहीं पहुंची। प्रतिदिन 4-5 घंटे की लाइन में रहने के बाद भी उन्हें खाली हाथ जाना पड़ता है।

उनकी पत्नी रेनू देवी बताती हैं कि हालात इतने बुरे हैं कि कई बार बच्चों को मैगी खिलाड़ी या प्रेमिका सुलाना पड़ रही हैं। वहीं प्रतिमा देवी के घर से दो दिन तक खाना नहीं बनाया गया और बच्चों को सोने के लिए मजबूर किया गया।

गैस कंपनी ने ब्लैक मार्केटिंग का भी लगाया आरोप। मनीष कुमार झा और अन्य लोगों का कहना है कि गैस की हेराफेरी हो रही है, इसके बावजूद गैस की हेराफेरी हो रही है। कुछ लोगों ने बताया कि पोर्टलैंड कई दिनों से बंद पड़ा है।

आंकड़ों के मुताबिक, पटना में 16.65 लाख लाख के पैकेज रोज की मांग 40 हजार से ज्यादा है, जबकि सप्लाई करीब आधी ही हो पा रही है। अवलोकन 1.58 लाख लाभ का बैकलॉग है, जिसकी स्थिति और विमोचन किया गया है।

अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि यदि जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञ ने लकड़ी, कोयला और अन्य जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की सलाह दी है। इंडस्ट्रीज़, लोगों के लिए रसोई गाड़ी बड़ी चुनौती बन गई है।

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