धनबाद से आस्था और समर्पण की एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जहां लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर किन्नर समुदाय ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाज को एकता और समरसता का संदेश दिया।
चैती छठ के तीसरे दिन धनबाद के न्यू मटकुरिया रेलवे कॉलोनी में बनाए गए कृत्रिम छठ घाट पर किन्नर समाज के लोगों ने पूरे विधि-विधान के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान व्रतियों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हुए भगवान भास्कर और छठी मईया की पूजा-अर्चना की।
किन्नर समुदाय की विभा और काजल किन्नर ने बताया कि वे हर साल पूरी श्रद्धा के साथ छठ व्रत रखती हैं। उनका कहना है कि छठी मईया से वे धनबाद सहित पूरे समाज की खुशहाली, सुख-समृद्धि और शांति की कामना करती हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है।
पूजा के दौरान किन्नर समुदाय के लोगों ने पारंपरिक गीत गाए, नृत्य किया और भक्ति में लीन होकर सूर्य भगवान की उपासना की। घाट पर मौजूद लोगों ने भी इस अनोखी पहल की सराहना की और किन्नर समाज के इस योगदान को सामाजिक समावेश का एक सकारात्मक संदेश बताया।
अब सभी व्रती कल सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे, जिसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत संपन्न हो जाएगा। छठ महापर्व के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के इस पर्व में सभी वर्गों की भागीदारी समान रूप से महत्वपूर्ण है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
