जामताड़ा जिला के नाला प्रखंड से सरकारी स्कूलों की बदहाली की तस्वीर सामने आई है, जहां शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से संसाधनों की कमी से जूझ रही है। प्राथमिक विद्यालय घोलजोड़ और उत्क्रमित मध्य विद्यालय पाकुड़िया की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि यहां बच्चों की पढ़ाई किस तरह प्रभावित हो रही है।

 

प्राथमिक विद्यालय घोलजोड़ में पूरे स्कूल का संचालन केवल एक शिक्षिका रूपाली घोष के भरोसे चल रहा है। वे सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। स्कूल में प्रधानाध्यापक का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। जानकारी के अनुसार, पूर्व प्रधानाध्यापक ने अपना डेपुटेशन मधुबन में करवा लिया, जिसके बाद यहां नई नियुक्ति नहीं हुई। एक शिक्षिका के भरोसे इतने बड़े विद्यालय का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

 

वहीं उत्क्रमित मध्य विद्यालय पाकुड़िया की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। इस विद्यालय में बाउंड्री नहीं होने के कारण आवारा पशु स्कूल परिसर में खुलेआम घूमते नजर आते हैं। कई बार तो स्कूल के समय में ही पशु क्लास रूम के आसपास घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है। इतना ही नहीं, बच्चों के मिड-डे मील का खाना भी पशु खा जाते हैं, जिससे छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

इस विद्यालय में भी शिक्षकों की भारी कमी है। यहां एक भी नियमित सरकारी शिक्षक नहीं है और केवल तीन सहायक शिक्षकों के भरोसे स्कूल चल रहा है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों विद्यालयों में जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और पाकुड़िया स्कूल में बाउंड्री का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शिक्षा मिल सके।

 

रिपोर्ट – संतोष कुमार

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *