बिहार, जिसे देश की आत्मा कहा जाता है, आज अपना 114वां स्थापना दिवस मना रहा है। 22 मार्च 1912 को बिहार को बंगाल से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की गयी। यह दिन सिर्फ राज्य गठन का नहीं, बल्कि एक नई पहचान और समृद्ध यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। इस ऐतिहासिक बदलाव में सच्चिदानंद सिन्हा की अहम भूमिका रही, अलग-अलग बिहार राज्य की मांग को उठाया गया।
बिहार अपनी गौरवशाली विरासत, समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए पूरे देश और दुनिया में जाना जाता है। अक्सर इसकी पहचान लिट्टी-चोखा तक ही सीमित है, लेकिन बिहार की संस्कृति कहीं अधिक व्यापक है। लिट्टी-चोखा जहां सादगी और स्वाद का प्रतीक है, वहीं मखाना आज ग्लोबल लेवल पर ‘सुपरफूड’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। देश का कुल उत्पादन 80-90 प्रतिशत मखाना बिहार में होता है।
कला और संस्कृति की बात करें तो चित्रकारी बिहार की आत्मा बनी है। प्राकृतिक से बनी ये पेंटिंग्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत बढ़िया जा रही हैं। वहीं, प्राचीन शिक्षा केंद्र जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र ने बिहार को वैश्विक ज्ञान की राजधानी बनाया था, जहां विद्वानों से छात्र अध्ययन करने आते थे।
धार्मिक दृष्टि से भी बिहार का महत्व बेहद खास है। बोधगया में गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई, जबकि भगवान महावीर ने जैन धर्म का प्रचार किया। इसके अलावा लोक आस्था का महापर्व छठ को बिहार की पहचान बना दिया गया है, जो सूर्य पूजा और प्रकृति के प्रति आकर्षण का प्रतीक है।
इतिहास में बिहार का प्राचीन नाम मगध था, जहाँ मौर्य और गुप्त जैसे महान साम्राज्यों का जन्म हुआ। सम्राट अशोक और चंद्रगुप्त मौर्य जैसे शासकों ने भारत को नई दिशा दी।
बिहार दिवस केवल उत्सव नहीं है, बल्कि उस गौरवशाली अतीत को याद करने का अवसर है, जो भारत को ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिकता की राह दिखाता है। आज बिहार विकास के पथ पर पर्यावरण है और अपनी विरासत के साथ भविष्य को भी मजबूत बना रहा है।
