बिहार में बीते दिन आए आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश ने किसानों की जिंदगी में भारी तबाही मचा दी है। कहीं तेज हवाएं चलीं तो कहीं बारिश के साथ ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर सहरसा सुपौल और मधेपुरा में देखने को मिला है।
बताया जा रहा है त्रिवेणीगंज प्रखंड के जदिया थाना क्षेत्र के तमकुलहा गांव में करीब एक सौ एकड़ से भी ज्यादा में लगी मक्का की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। खेतों में लहलहा रही फसल आंधी और ओलावृष्टि की मार नहीं सह सकी और देखते ही देखते जमीन पर बिछ गई। इस नुकसान से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
वही सहरसा जिले के बनवा इटहरी के मोहनपुर गांव में भी हालत वैसा ही बना हुआ है यहां भी सैकड़ो एकड़ फसल बर्बाद हो चुके हैं
स्थानीय किसान विकास कुमार ने बताया कि इस इलाके की मुख्य फसल मक्का है और इसी पर किसानों की आजीविका निर्भर करती है। लेकिन अचानक आए इस आंधी-तूफान ने सब कुछ तबाह कर दिया। उन्होंने कहा कि खेतों में लगी पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है और अब उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसल को जड़ से उखाड़ दिया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह गिरकर सड़ने की स्थिति में पहुंच गई है। इस आपदा के बाद गांव में मायूसी का माहौल है और किसान त्राहिमाम कर रहे हैं।
पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार की ओर से मदद नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन किसानों को जल्द राहत मिलने का इंतजार है।
