बिहार के मुंगेर किला का उतरी गेट, जो लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ था, अब नई जिंदगी पाने जा रहा है। पुरातत्व विभाग की मंजूरी के बाद इस ऐतिहासिक गेट की मरम्मत विशेषज्ञों और कुशल कारीगरों की देखरेख में कराई जाएगी। खास बात यह है कि बाहर से आए स्पेशलिस्ट कारीगर इसे उसके मूल स्वरूप में बहाल करेंगे।

 

गंगा तट पर स्थित यह किला सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है। मुंगेर किला केवल एक धरोहर नहीं है, बल्कि आज भी यह जीवंत परिसर के रूप में कार्य करता है। यहां प्रशासनिक कार्यालय, आवासीय क्षेत्र, जेल, सिविल न्यायालय और अन्य सरकारी संस्थान मौजूद हैं।

 

समय के साथ रख-रखाव के अभाव में किले का उतरी गेट काफी जर्जर हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि गेट के ऊपर से पत्थर गिरने लगे थे, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते थे। पहले जिला प्रशासन ने मरम्मत की कोशिश की थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते काम पूरा नहीं हो सका। सुरक्षा की दृष्टि से गेट को बड़े वाहनों के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि पैदल और दोपहिया वाहनों के लिए सीमित आवाजाही जारी थी।

 

अब जिलाधिकारी निखिल धनराज की पहल पर इस ऐतिहासिक गेट के पुनर्निर्माण में बड़ी सफलता मिली है। पुरातत्व विभाग ने मरम्मत के लिए मंजूरी दे दी है।

 

जिलाधिकारी ने बताया कि मरम्मत में विशेषज्ञ टीम और कुशल कारीगर काम करेंगे। उनका उद्देश्य है कि गेट की मरम्मत इस तरह से हो कि उसका मूल ऐतिहासिक स्वरूप सुरक्षित रहे। विशेषज्ञों की देखरेख में पुराने ढांचे को पुनर्स्थापित किया जाएगा, ताकि यह गेट फिर से अपनी पुरानी भव्यता और शान में नजर आए।

 

निखिल धनराज, जिलाधिकारी मुंगेर: “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि गेट का ऐतिहासिक स्वरूप पूरी तरह संरक्षित रहे और भविष्य में यह सुरक्षित भी रहे। इसके लिए अनुभवी कारीगर और विशेषज्ञ इस काम में लगे हुए हैं।”

 

मुंगेर किला का यह उतरी गेट जल्द ही अपनी पुरानी शान में लौटेगा। मरम्मत कार्य के पूरा होने के बाद न केवल सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि यह किला अपने ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप भव्य रूप में दिखाई देगा।

 

इस प्रयास से न केवल स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि मुंगेर किले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी संरक्षित किया जा सकेगा।

 

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