सावन के पावन महीने में बाबा भोलेनाथ की भक्ति का रंग हर तरफ देखने को मिल रहा है। इसी आस्था के बीच भोजपुरी लोक गायिका निशा उपाध्याय भी कांवड़ लेकर सुल्तानगंज से पैदल देवघर के लिए रवाना हुईं। उन्होंने सुल्तानगंज की पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की और इसके बाद कंधे पर कांवड़ उठाकर बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के संकल्प के साथ यात्रा शुरू की।
निशा उपाध्याय कच्ची कांवरिया पथ से होते हुए पैदल देवघर की ओर बढ़ रही हैं। यात्रा के दौरान उनके साथ श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह देखने को मिला। आम कांवरियों की तरह उन्होंने भी भगवा वस्त्र धारण कर कांवड़ उठाई और भगवान शिव का जयकारा लगाते हुए अपनी यात्रा आगे बढ़ाई।
विश्व कल्याण और परिवार की सुख-शांति की कामना
कांवड़ यात्रा के दौरान बातचीत में निशा उपाध्याय ने बताया कि वह बाबा भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा के चलते यह यात्रा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कामना है कि पूरे विश्व में सुख-शांति बनी रहे और सभी लोगों का कल्याण हो। इसके साथ ही वह अपने परिवार के लिए भी सुख, शांति और समृद्धि की कामना लेकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार जा रही हैं।
यात्रा के दौरान कच्ची कांवरिया पथ पर निशा उपाध्याय ने भगवान शिव की भक्ति से जुड़े गीत भी गुनगुनाए। उनकी आवाज सुनकर आसपास मौजूद कांवरिया श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ गया। कुछ देर के लिए कांवरिया पथ का माहौल भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भी उनके साथ भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
कांवरिया पथ पर दिखा अलग अंदाज
भोजपुरी संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी निशा उपाध्याय को कांवड़ यात्रा के दौरान सामान्य श्रद्धालु की तरह पैदल चलते देख आसपास के लोगों में भी उत्सुकता नजर आई। हालांकि यात्रा के दौरान उनका पूरा ध्यान बाबा भोलेनाथ की भक्ति और अपने संकल्प को पूरा करने पर रहा।
सुल्तानगंज से देवघर तक की यह पैदल कांवड़ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से जुड़ी है। सावन में लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से बाबा बैद्यनाथ को जल चढ़ाने के लिए देवघर पहुंचते हैं। निशा उपाध्याय भी इसी आस्था की कड़ी में शामिल होकर बाबा के दरबार की ओर बढ़ रही हैं।





