भागलपुर जिले के जगदीशपुर प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। वार्ड संख्या 08 के ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इलाके में लगा चापाकल पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है, जिसके कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। मजबूर होकर ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को लिखित आवेदन देकर जल्द समाधान की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि मोहल्ले का यह चापाकल ही पानी का मुख्य स्रोत था, लेकिन इसके खराब हो जाने के बाद से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। खासकर गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की समस्या और विकराल रूप लेने लगी है। लोगों को पीने का पानी लाने के लिए दूर-दराज के इलाकों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने अब सामूहिक रूप से प्रशासन के पास अपनी बात रखी है। उन्होंने बीडीओ को आवेदन सौंपकर चापाकल की जल्द मरम्मत कराने और स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव उनकी जिंदगी को बेहद कठिन बना रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं महिलाएं सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ पानी की जुगाड़ में लगी रहती हैं। कई परिवारों को पीने के पानी के लिए पैसे खर्च कर खरीदना भी पड़ रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। बढ़ती गर्मी के साथ पानी की जरूरत और बढ़ेगी, ऐसे में प्रशासन की निष्क्रियता लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इस मुद्दे को लेकर लोगों में आक्रोश भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।
आवेदन में ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि न सिर्फ खराब चापाकल को ठीक किया जाए, बल्कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए क्षेत्र में स्थायी और मजबूत पेयजल व्यवस्था विकसित की जाए। उनका कहना है कि एक ही जल स्रोत पर निर्भरता के कारण इस तरह की समस्याएं बार-बार सामने आती हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, गांव के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी इस समस्या पर जल्द ध्यान दिया जाएगा और उन्हें पानी के संकट से निजात मिलेगी।
