बिहार के जिलों से आदिवासियों को झकझोर देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 62 बंधुआ आदिवासियों को आजाद कराया है। इन बाइबिल में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं, जो पिछले करीब 30 साल से बंधुआ माफिया बनाने को मजबूर थे।
यह मामला पूर्वी बथान गांव का है। जिले के मूल निवासी शशांक शुभंकर को गुप्त सूचना मिली थी कि इलाके में एक बदमाश पर अवैध रूप से बंधुआ मॅगा पाया जा रहा है। सेले हुए शिक्षकों को दी गई सूचना, तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
इसके बाद सहायक समाहर्ता डॉ. सूरज कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में मोटिवेट लैबर कमिश्नर, स्पेशिया के डेवेलपमेंट डेवलपमेंट और पुलिस बल को शामिल किया गया। टीम ने योजनाबद्ध तरीके से बॉलटेकर की तलाश शुरू कर दी है।
वस्तु के दौरान जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद आकर्षक वाली थी। मॉय से कुल 62 मूर्तियाँ अंकित की गईं, जिनमें कई महिलाएँ और बच्चे भी थे। ये सभी श्रमिक वर्षों से बंधुआ स्थिति में काम कर रहे थे।
हालाँकि, एक्शन के दौरान बॉलटे का हीरो रामाशीष यादव मॉक से बिक गया। लेकिन टीम ने मंज़ूर मंडल यादव को गिरफ़्तार कर लिया है। इस मामले में गुरपा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।
सभी पुस्तिकाओं को सुरक्षित रूप से उनके घर भेज दिया गया है। आज़ादी मिलने के बाद अविश्वासी के रूप में ख़ुशी की झलक दिख रही है। एक महिला मजदूर ने कहा कि वे वर्षों से बंधुआ माफिया में थे और अब प्रशासन ने उन्हें नया जीवन दिया है।
जिला प्रशासन ने इस बात का पुख्ता सबूत दिया है कि बज्जालर को भी जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और फ़ासी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
