बिहार के शेखपुरा जिले से एक गैंगस्टर वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को (यूपीपीएससी) के सफल शेयरधारकों की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई। महुली थाना क्षेत्र के मुजफ्फरपुर गांव निवासी रंजीत कुमार यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने बिना बताए ही यूपीएससी टॉपर को शामिल कर लिया और लोगों को बेच दिया।

जानकारी के मुताबिक, रंजीत कुमार दिल्ली में काम करते थे और कहां से उन्होंने अपनी पक्की सफलता की कहानी गढ़ी। जैसे ही गांव और आसपास के क्षेत्र में उसकी यूपी सर्विस पास करने की खबर आती है, लोग उसे बधाई देते हुए उसके घर पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर उनका भव्य स्वागत भी किया गया। शेखपुरा के पूर्व विधायक विजय कुमार ने भी अपने गृह क्षेत्र में उन्हें सूतकेस और फूल-मालाओं से सम्मानित किया। यहाँ तक कि मंच प्रभारी ने भी उन्हें नामांकित पद पर नियुक्त कर दिया।

इस दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिसमें रंजीत की बातचीत और हाव-भाव को लेकर कुछ लोगों को शक हो गया। इसके बाद जब उनके दावे की जांच हुई तो पूरा मामला फ्रैंक का सामने आया। पता चला कि रणजीत ने यूपीएससी की परीक्षा नहीं दी थी।

दरअसल, 6 मार्च को यूपीएससी का रिजल्ट घोषित हुआ था, जिसमें कर्नाटक के एक नंबर रंजीत कुमार की ऑल इंडिया रैंक 440 मिली थी। इसी नाम का फ़ायदेमंद समूह शेखपुरा के रंजीत कुमार ने खुद को सक्सेसफुल कंपनी घोषित करना शुरू कर दिया।

सच्चाई सामने आती है ही रणजीत गांव को छोड़कर दिल्ली भाग गया था, लेकिन अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले के सामने आने के बाद गांव और इलाके में चर्चा का विषय है, जहां जिन लोगों ने उन्हें सम्मानित किया था, वे अब इस पर भी कुछ देखने से बच रहे हैं।

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