बिहार के जिले से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां पिछले तीन दिनों से गैस घोटाले की वजह से करीब 150 सिलेंडर का खाना लकड़ी और उपले के चूल्हे पर बनाया जा रहा है। इस स्थिति में सरकारी व्यवस्था और आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर प्रश्न दिए गए हैं।

पुलिस लाइन में भोजन बनाने की जिम्मेदारी जीविका समूह की महिलाओं के पास है, जिनमें आम तौर पर गैस पाइपलाइन की सुविधा भी शामिल है। लेकिन गैस उपलब्ध नहीं होने के कारण अब उन्हें पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इसे बनाने में समय ज्यादा लग रहा है और काम करना भी बेहद मुश्किल हो गया है।

मेस में जैतून जीविका दीदी आरती देवी ने बताया कि रोजाना 150 टुकड़ों के लिए भोजन तैयार करना होता है, लेकिन लकड़ी और गोइठा के चूल्हे पर खाना बनाना काफी मुश्किल होता है। चूल्हे से रेस्तरां वाले रेस्तरां के कारण काम करना कठिन हो जाता है और कई बार खाना पकाने में समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि गैस से खाना बनाना जल्दी और आसानी से हो जाता है।

इस समस्या को लेकर जीविका ग्रुप की महिलाओं ने प्रशासन से जल्द ही गैस सप्लाई उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मेस का ऑपरेशन ऑपरेशन रूप से हो सके और समय पर भोजन मिल सके।

हालाँकि, प्रशासन जिला का दावा है कि जिले में गैस की कोई सुविधा नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इसकी बावजूद पुलिस लाइन गैस की कमी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर कई सवाल उठाती है।

वहीं, स्थानीय गैस पेट्रोलियम कंपनी के खिलाड़ियों का कहना है कि नौकरी के लिए पहले नंबर पर लॉगइन करना होता है और बाद में ही गैस डेटिंग पर ओटीपी मिलना होता है। वर्तमान में करीब 25 दिन बाद नंबर आ रहा है, जिससे निजीकरण पर भारी संकट हो रहा है।

कुल मिलाकर, पुलिस लाइन में विस्फोटकों का खाना चूल्हे पर नामांकित सरकारी छात्रों की वैलिड बिल्डिंग को शामिल किया गया है।

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