बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। इस चुनाव में एनडीए की एकजुटता साफ तौर पर देखने को मिली, जबकि महागठबंधन के खेमे में बगावत और अनुपस्थिति के कारण परिणाम पूरी तरह एकतरफा हो गया।
इस चुनाव में Nitish Kumar सहित एनडीए के सभी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। प्रथम वरीयता के मतों की गिनती में Nitish Kumar को 44 वोट मिले। वहीं Nitin Nabin को भी 44 मत प्राप्त हुए। इसके अलावा Ramnath Thakur और Upendra Kushwaha को 42-42 वोट मिले, जबकि Shivesh Kumar Ram को भी जीत के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल हुआ।
राज्यसभा चुनाव के दौरान एनडीए के विधायकों ने पूरी एकजुटता के साथ मतदान किया। वहीं महागठबंधन के चार विधायक वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्षी खेमे की इस कमजोरी ने चुनाव परिणाम को काफी हद तक प्रभावित किया।
चुनाव परिणाम आने के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस जीत के पीछे खरीद-फरोख्त की राजनीति हुई है। हालांकि एनडीए नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे जनादेश की जीत बताया है। उनका कहना है कि यह परिणाम बिहार की जनता के विश्वास और एनडीए की एकजुटता का परिणाम है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Nitish Kumar की राज्यसभा में एंट्री बिहार की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। इसके साथ ही राज्य में सत्ता को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। खासकर Bharatiya Janata Party के नेतृत्व में नई सरकार की संभावनाओं को लेकर सियासी हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
फिलहाल राज्यसभा चुनाव में एनडीए की इस बड़ी जीत ने बिहार की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
