पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है. मतदान खत्म होने के बाद अब पांचवीं सीट को लेकर सियासी गणित काफी दिलचस्प हो गया है. एनडीए जहां पूरी तरह एकजुट नजर आया, वहीं महागठबंधन के खेमे में बिखराव देखने को मिला.

राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के समर्थन में एआईएमआईएम के पांच विधायकों का समर्थन जुटा लिया था, लेकिन अपने ही गठबंधन के विधायकों को पूरी तरह एकजुट नहीं रख पाए. जानकारी के मुताबिक राजद का एक और कांग्रेस के दो विधायक मतदान करने नहीं पहुंचे. इसके कारण महागठबंधन की संख्या घट गई और पांचवीं सीट का मुकाबला फंसता हुआ नजर आ रहा है.

बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हो रहा है. एक सीट जीतने के लिए करीब 41 वोटों की जरूरत होती है. एनडीए के पास विधानसभा में 202 विधायक हैं. इस हिसाब से एनडीए चार सीटों पर आराम से जीत हासिल कर सकता है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ रही है.

दूसरी ओर महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं. एआईएमआईएम के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक के समर्थन से यह संख्या 41 तक पहुंच सकती थी. लेकिन तीन विधायकों के मतदान में अनुपस्थित रहने से यह आंकड़ा घट गया. ऐसे में पांचवीं सीट के लिए दोनों पक्षों के पास करीब 38-38 वोट होने की स्थिति बन गई है.

राज्यसभा का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष होता है. इसमें विधायक सिंगल ट्रांसफरेबल वोट यानी एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत मतदान करते हैं. मतपत्र पर उम्मीदवारों को पहली, दूसरी और तीसरी वरीयता के आधार पर वोट दिया जाता है.

जानकारों के मुताबिक यदि पहली वरीयता के वोट बराबर हो जाते हैं तो दूसरी वरीयता के वोट गिने जाते हैं. चूंकि विधानसभा में एनडीए का बहुमत है, इसलिए दूसरी वरीयता के वोटों में एनडीए के उम्मीदवार को बढ़त मिलने की संभावना है. ऐसी स्थिति में पांचवीं सीट भी एनडीए के खाते में जा सकती है.

इस चुनाव में भाजपा से नितिन नबीन और शिवेश कुमार राम, जदयू से नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा से उपेंद्र कुशवाहा एनडीए समर्थित उम्मीदवार हैं. वहीं महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह मैदान में हैं. अब सभी की नजरें मतगणना और अंतिम नतीजों पर टिकी हैं.

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