पटना: बिहार में सामुहिक दल के पांच सदस्यों के लिए चल रहा घोटाला घमासन के बीच एक बड़ा हथियार घोटाला का विषय बन गया है। मतदान से ठीक पहले रविवार की शाम बिहार विधानसभा के सचिव नामांकित सिंह के आदेश जारी कर दिया गया। चुनाव प्रक्रिया के अहम समय पर यह फैसला सामने आने के बाद राजनीतिक और स्वायत्त हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की पूरी प्रक्रिया का संचालन क्षेत्र सचिव नामे सिंह के जिम्मे था। वे इस चुनाव में मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) की भूमिका भी निभा रही थीं। ऐसे में वोट से ठीक पहले उनकी पत्रिका की अधिसूचना जारी होने से कई सवाल पूछे गए हैं। हालाँकि सरकारी प्राधिकारी का कहना है कि यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।

जारी आदेश के मुताबिक, चैरिटी सिंह को अब पटना हाई कोर्ट में नई जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन तबादले के बावजूद वे लघु बिहार विधानसभा में ही अपने आश्रम दे रही हैं। प्रस्ताव के अनुसार जब तक कोई भी अधिकारी अपने नए पद पर नामांकन के रूप में से कोई भी पद ग्रहण नहीं कर पाता, तब तक वह अपने स्थिर पद की जिम्मेदारियां निभा सकता है।

इसी कारण से साेचेमी चुनाव के दिन साेचेमी सिंह विधानसभा क्षेत्र में मौजूद हैं और मुख्य रिटर्निंग आॅफसर के तौर पर मतदान की पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में बैचलर द्वारा वोटिंग प्रक्रिया को तय करके पूरा किया जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में इस शहरी बदलाव को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं तो हो ही रही हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ रहा है। चुनाव आयोग और जिला प्रशासन का कहना है कि पूरी तरह से प्रक्रियाधीन और निर्धारित पद के तहत नामांकन किया जा रहा है।

अब ऑर्गनाइजेशन सहयोगी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद बिहार विधानसभा के नए सचिव के रूप में किस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। निर्विरोध प्रक्रिया जारी है और सभी सांचे के सदस्य अपने-अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

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