पटना: बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर समेत अन्य शिक्षक पदों पर बहाली की चर्चा के बीच पीएचडी शोधार्थियों का आंदोलन तेज हो गया है। ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के बैनर तले शोधार्थी पटना के गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पर पिछले छह दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन की शुरुआत 4 अगस्त से हुई थी।
तीन शोधार्थी कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीक्कू सिंह प्रधान लगातार अनशन पर हैं। इनके समर्थन में राज्य के अलग-अलग जिलों से शोधार्थी पटना पहुंच रहे हैं।
छह सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन
शोधार्थियों की प्रमुख मांगों में यूजीसी की पुरानी नियमावली के प्रावधान लागू करना, पीएचडी और नेट-जेआरएफ के लिए अलग-अलग वेटेज तय करना, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करना, सभी विषयों में रिक्त पदों पर नियमित बहाली और नियुक्ति प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति लागू करना शामिल है। इसके अलावा स्नातक और स्नातकोत्तर महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के अंग के रूप में विकसित करने की भी मांग की गई है।
शोधार्थियों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पीएचडी को 30 अंक, जेआरएफ को 7 अंक, नेट को 5 अंक और एमफिल को 5 अंक का वेटेज दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि पीएचडी पूरी करने में कई वर्षों का समय लगता है, इसलिए शोध उपलब्धि के अनुरूप उचित अंक मिलना जरूरी है।
राजनीतिक दलों का समर्थन
आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। कांग्रेस सांसद पप्पू यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम शोधार्थियों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन कर चुके हैं। भाकपा माले की विधान पार्षद शशि यादव और विधायक संदीप सौरभ ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन जताया।
संदीप सौरभ ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली यूजीसी के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने आयु सीमा में बढ़ोतरी और उच्च शिक्षा में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग का समर्थन किया।
सरकार से वार्ता की मांग
शोधार्थी रजनीश यादव का आरोप है कि छह दिन बीतने के बावजूद सरकार की ओर से वार्ता के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है। वहीं अनशनकारी कुमुद पटेल ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
अब सवाल यह है कि सरकार शोधार्थियों की मांगों पर कब वार्ता शुरू करती है और प्रस्तावित असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली में उन्हें कितना अवसर मिलता है।




