पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये का इजाफा किया गया है। नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं।

 

कीमत बढ़ने के बाद अब राजधानी दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 863 रुपये से बढ़कर 913 रुपये का हो गया है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये की वृद्धि की गई है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर 1883 रुपये में मिलेगा, जबकि मुंबई में इसकी कीमत बढ़कर 1835 रुपये हो गई है। गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट के साथ-साथ होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी पड़ सकता है।

 

दरअसल, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदले हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। इस स्थिति के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में और उछाल आ सकता है।

 

भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में भारत में करीब 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई थी। इसमें से केवल 1.28 करोड़ टन गैस का उत्पादन देश में हुआ, जबकि बाकी गैस विदेशों से आयात करनी पड़ी।

 

भारत मुख्य रूप से खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब जैसे देशों से एलपीजी आयात करता है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में युद्ध या समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है तो गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि यही रास्ता खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है।

 

इसी स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी उत्पादन में किया जाए, ताकि देश में गैस की उपलब्धता बनी रहे।

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