गया: बिहार के गया जिले के चाकंद क्षेत्र के रहने वाले 65 वर्षीय रंजन पासवान पिछले 39 वर्षों से एक मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान वह 500 से ज्यादा बार धरना दे चुके हैं और 1000 से अधिक नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों और सरकार का ध्यान अपनी मांग की ओर खींच चुके हैं। बावजूद इसके उनकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।
रंजन पासवान की दो प्रमुख मांगें हैं—फल्गु नदी पर बिथो वीयर बांध का निर्माण और चाकंद में प्रखंड मुख्यालय की स्थापना। उनका कहना है कि बांध बनने से गया और जहानाबाद के कई विधानसभा क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की बोरिंग पर निर्भरता कम होगी और भूजल स्तर में भी सुधार हो सकता है।
रंजन ने 26 साल की उम्र में वर्ष 1987 में पहली बार आंदोलन शुरू किया था। इसके पीछे उनकी मां से जुड़ी एक दर्दनाक घटना थी। खेत में सिंचाई के दौरान डीजल पंप की चपेट में आने से उनकी मां घायल हो गई थीं। इसी घटना के बाद उन्होंने फल्गु नदी से सिंचाई की स्थायी व्यवस्था की मांग को लेकर संघर्ष का संकल्प लिया।
वर्ष 1990 में बिथो पैन संघर्ष समिति बनी, जिसमें बड़ी संख्या में किसान और मजदूर जुड़े। कई बार सरकारों की ओर से आश्वासन और योजनाओं की घोषणा भी हुई। 2015 में बिथो वीयर बांध के लिए डीपीआर तैयार होने की बात सामने आई, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। फल्गु नदी पर बाद में रबर डैम भी बना, लेकिन रंजन की मूल मांग पूरी नहीं हुई।
इस लंबे संघर्ष का असर उनके परिवार पर भी पड़ा। बेटी साधना कुमारी बताती हैं कि परिवार ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन वे पिता का साथ नहीं छोड़ेंगे। रंजन के पास आज भी अपनी जमीन पर मकान नहीं है और परिवार सरकारी जमीन पर बने छोटे से घर में रहता है।
अब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से बिथो वीयर बांध बनाने की घोषणा के बाद रंजन को नई उम्मीद जगी है। हालांकि उनका कहना है कि जब तक काम जमीन पर शुरू नहीं होता, तब तक सिर्फ घोषणा पर भरोसा करना मुश्किल है। उनका संकल्प साफ है—मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।





