बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच जेडीयू के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पार्टी के कुछ कार्यकर्ता और नेता खुलकर सामने आ गए हैं और उन्होंने साफ कहा है कि वे किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा नहीं जाने देंगे।

 

वीओ-1:

दरअसल, इन दिनों यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है। इसी खबर के सामने आते ही जेडीयू के कई कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर हम रोएं नहीं तो क्या करें? हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लाठीचार्ज और लात-घूंसे तक सहे हैं।

 

वीओ-2:

राजीव रंजन पटेल ने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर नीतीश कुमार के लिए वोट मांगे थे। जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किया है। अगर अब वह मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तो बिहार की जनता कहां जाएगी? कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी और सरकार का चेहरा नीतीश कुमार ही हैं और उन्हें मुख्यमंत्री पद पर ही बने रहना चाहिए।

 

वीओ-3:

जेडीयू नेता ने आगे कहा कि अगर किसी को मुख्यमंत्री बदलना है तो पहले चुनाव कराकर बहुमत हासिल करे। अगर किसी नेता को लगता है कि उसके चेहरे पर जनता भरोसा करेगी, तो वह चुनाव जीतकर दिखाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कार्यकर्ताओं की मांग है कि अगर राज्यसभा भेजना ही है तो नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भेजा जाए।

 

वीओ-4:

राजीव रंजन पटेल ने यह भी कहा कि हम लोग नीतीश कुमार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को नॉमिनेट किया जाए, लेकिन नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने का फैसला कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेंगे।

 

एंकर आउट्रो:

फिलहाल इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू नेतृत्व इस विरोध को कैसे संभालता है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर आगे क्या फैसला होता है।

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