बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। जेडीयू ने राज्यसभा की दो सीटों पर अभी तक अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्री राम नाथ ठाकुर का दोबारा राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन दूसरी सीट को लेकर मंथन जारी है।


इस बीच ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के बयान ने हलचल मचा दी, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि निशांत राजनीति में एंट्री कर सकते हैं। बाद में संजय झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेताओं ने भी इस चर्चा को बल दिया। होली के दिन यह कयास और तेज हो गए कि खुद नीतीश कुमार राज्यसभा जा सकते हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


यदि मुख्यमंत्री राज्यसभा जाते हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है और निशांत को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि कई विधायकों ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई है और अगर कोई बड़ा फैसला होता है तो पहले विधायकों की बैठक बुलाई जाएगी।


सीएम आवास पर मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी और श्रवण कुमार की मौजूदगी ने चर्चाओं को और हवा दी। वहीं जेडीयू विधान पार्षद संजय गांधी ने साफ कहा कि नीतीश कुमार कहीं नहीं जा रहे हैं। एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान ने भी मुख्यमंत्री बदलने की खबरों को सिरे से खारिज किया और कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार मजबूत है।


सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत दोनों के नामांकन पत्र तैयार कराए गए हैं और अंतिम निर्णय स्वयं मुख्यमंत्री को लेना है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी कहा है कि उम्मीदवार तय करने का अधिकार मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के पास है।


दरअसल 75 वर्षीय नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और पार्टी में नए नेतृत्व को लेकर भी चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जेडीयू का फैसला बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल सभी की नजर अंतिम घोषणा पर टिकी है।

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