
राजधानी पटना से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर युवक ने केंद्रीय मंत्री के नाम का दुरुपयोग कर जेल प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की। आरोपी ने खुद को केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का निजी सचिव बताकर भागलपुर मंडल कारा में बंद एक कैदी को तत्काल पटना के बेऊर केंद्रीय कारा स्थानांतरित करने का दबाव बनाया। लेकिन जेल प्रशासन की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह साजिश समय रहते नाकाम हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना 4 अगस्त की दोपहर करीब 3:50 बजे की है। सचिवालय थाना क्षेत्र स्थित जेल विभाग को एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को केंद्रीय मंत्री का निजी सचिव बताते हुए भागलपुर जेल में बंद एक कैदी को तत्काल बेऊर जेल भेजने का निर्देश दिया। शुरुआत में मामला आधिकारिक प्रतीत हुआ, लेकिन बातचीत के तरीके और परिस्थितियों को देखते हुए जेल अधिकारियों को संदेह हो गया।
अधिकारियों ने बिना देर किए केंद्रीय मंत्री के वास्तविक निजी सचिव से संपर्क कर पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच में स्पष्ट हो गया कि मंत्री कार्यालय की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया था। इसके बाद मामला फर्जीवाड़े का निकला और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।
तकनीकी सर्विलांस और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान अरवल जिले के मेहंदिया निवासी धीरज कुमार के रूप में हुई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और सचिवालय थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि धीरज कुमार पहले भी कई बार खुद को जज, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और मंत्रियों का निजी सचिव बताकर सरकारी अधिकारियों को फर्जी फोन कर चुका है। पटना सेंट्रल की एसपी ममता कल्याणी ने बताया कि आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कैदी का स्थानांतरण क्यों कराना चाहता था और इसके पीछे उसकी असली मंशा क्या थी। साथ ही इस पहलू की भी जांच हो रही है कि कहीं वह किसी संगठित गिरोह के लिए काम तो नहीं कर रहा था या फिर बेऊर और भागलपुर जेल से जुड़े किसी आपराधिक नेटवर्क का इस पूरे मामले से कोई संबंध तो नहीं है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे षड्यंत्र का खुलासा हो सकेगा।





