गंगा की बाढ़ से लाखों लोगों की रक्षा करने वाला भागलपुर जिले का इस्माइलपुर बिंटोली तटबंध इन दिनों अवैध अतिक्रमण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। तटबंध के स्पर्श संख्या-1 और 2 के बीच बड़े पैमाने पर लोगों ने भूसा, मक्का का लारा, जलावन की लकड़ियां तथा अन्य सामग्री रखकर कब्जा कर लिया है। इससे जल संसाधन विभाग को तटबंध की नियमित निगरानी, निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत कार्य करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, जल संसाधन विभाग ने इस्माइलपुर के अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी को कई बार लिखित आवेदन देकर तटबंध को अतिक्रमण मुक्त कराने का अनुरोध किया है। इसके बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब तटबंध पर अतिक्रमण हुआ हो। कुछ वर्ष पहले भी इसी तरह भूसा और अन्य सामान रखे जाने से विभाग नियमित निरीक्षण नहीं कर सका था। निगरानी प्रभावित होने के कारण चूहों ने तटबंध के भीतर बिल बना दिए, जिससे तटबंध कमजोर हो गया और बाद में टूट गया था। उस समय बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया था। हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी, लोगों के घर जलमग्न हो गए थे और सरकार को तटबंध की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च करने पड़े थे।
स्थानीय ग्रामीण नेपाली यादव ने बताया कि कई बार अतिक्रमणकारियों से सामान हटाने की अपील की गई, लेकिन किसी ने बात नहीं मानी। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में फिर से बड़ी आपदा आ सकती है।
बाढ़ सुरक्षा के लिहाज से तटबंध को पूरी तरह खाली और सुरक्षित रखना बेहद जरूरी माना जाता है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, अंचल प्रशासन और पुलिस से संयुक्त अभियान चलाकर तटबंध को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बरसात के मौसम में लाखों लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।






