अररिया/पूर्वी चंपारण: नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं। बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज सहित सभी सीमावर्ती जिलों में चौकसी बढ़ा दी गई है। एसएसबी और बिहार पुलिस लगातार संयुक्त गश्त कर रही हैं, जबकि मधुबनी से जनकपुर तक चलने वाली ट्रेन का परिचालन फिलहाल रोक दिया गया है।
अररिया के जोगबनी, फारबिसगंज, फुलकाहा और सिकटी क्षेत्र में एसएसबी, बिहार पुलिस और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल ने संयुक्त रूप से सीमा का निरीक्षण किया। जिला प्रशासन लगातार सीमा क्षेत्र की निगरानी कर रहा है। फारबिसगंज के डीएसपी राज किशोर कुमार ने कहा कि सीमा पर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
उधर, पूर्वी चंपारण से सटी झरौखर सीमा चौकी पर भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता 71वीं वाहिनी एसएसबी के उप कमांडेंट संतोष कुमार और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के डीएसपी सजेन्द्र प्रसाद श्रेष्ठ ने की। दोनों देशों ने संयुक्त गश्त बढ़ाने, रात्रि गश्त को प्रभावी बनाने, तीसरे देशों के नागरिकों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल साझा करने पर सहमति जताई।
सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती ग्रामीणों से अफवाहों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।
दरअसल, 26 जुलाई को नेपाल के सुनसरी जिले के देवागंज में कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक जुलूस, डीजे और झंडे को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसा में बदल गया। हिंसा बाद में मधेश क्षेत्र तक फैल गई, जिसके बाद नेपाल पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू लागू है।
इस घटना के विरोध में विराटनगर में विभिन्न हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, मोरंग जिला प्रशासन ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।






