बिहार का मखाना बना ग्लोबल ब्रांड, दरभंगा से 7 टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा रवाना

पटना: बिहार का प्रसिद्ध मखाना एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहा है। एपीडा (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के सहयोग से 29 जुलाई को दरभंगा से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए 7 मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा निर्यात किया गया। इस उपलब्धि से मिथिलांचल के मखाना किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस पहल से जुड़े किसानों को 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर मूल्य मिल रहा है और बिहार का प्रीमियम मखाना अब वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान बना रहा है।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसे बिहार के किसानों की मेहनत और राज्य की कृषि क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि “लोकल से ग्लोबल” अभियान को नई मजबूती देती है और बिहार को कृषि निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

एपीडा, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, किसानों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार, गुणवत्ता सुधार, बेहतर पैकेजिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत में हर वर्ष लगभग 1.20 लाख टन मखाने का उत्पादन होता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत है। राज्य के लगभग 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती होती है और इससे हजारों किसान जुड़े हैं। दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, समस्तीपुर, कटिहार, पूर्णिया और भागलपुर प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

सितंबर 2025 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन किया था। इसके बाद अनुसंधान, विपणन और निर्यात को बढ़ावा मिला, जिससे लाखों किसानों को लाभ पहुंचा है। इससे पहले फरवरी 2026 में बिहार से 5 टन मखाना चीन भी भेजा गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार मखाना केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इसमें फैट कम, जबकि मैग्नीशियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय, नसों और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। यही वजह है कि बिहार का मखाना अब देश ही नहीं, दुनिया की थाली तक अपनी खास पहचान बना रहा है।

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