गया: बिहार के गया जिले के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की महज 2 वर्ष 10 माह की वाणी अपनी असाधारण प्रतिभा से सबको हैरान कर रही है। वाणी 150 से अधिक देशों के झंडों को देखकर तुरंत संबंधित देश का नाम बता देती है। उसकी अद्भुत स्मरण शक्ति और रंगों की गहरी पहचान के कारण उसका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
वाणी के पिता रविकांत कुमार, जो टिकारी में एक निजी वित्तीय संस्था की शाखा के प्रबंधक हैं, बताते हैं कि शुरुआत में वाणी ने खेल-खेल में 20 देशों के झंडे पहचान लिए। इसके बाद उन्होंने उसकी रुचि को देखते हुए दुनिया के विभिन्न देशों के झंडों की तस्वीरें दिखानी शुरू कीं। वाणी रोजाना 5 से 10 नए झंडे याद करती और अगले दिन खुद नए झंडे दिखाने की जिद करती थी।
रविकांत के अनुसार, वाणी बचपन से ही रंगों को लेकर बेहद संवेदनशील रही है। पहले उसने अलग-अलग रंग पहचानना सीखा, फिर उन्हीं रंगों के आधार पर देशों के झंडे याद कर लिए। यही उसकी असाधारण प्रतिभा की सबसे बड़ी पहचान बन गई।
29 जून 2026 को वाणी को 45 एशियाई देशों के झंडे पहचानने पर पहला सम्मान मिला। इसके बाद उसने महज कुछ दिनों में 127 देशों के झंडे याद कर लिए। 13 जुलाई 2026 को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने उसके रिकॉर्ड की पुष्टि की। फिलहाल 153 देशों के झंडों की पहचान का सत्यापन जारी है।
वाणी की मां पल्लवी मिश्रा और दादा राम पांडे बताते हैं कि सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि वाणी अभी अपना नाम ठीक से नहीं बोल पाती, लेकिन सैकड़ों देशों के नाम झंडे देखकर बता देती है। 127 देशों के झंडों की पहचान उसने मात्र 6 मिनट 35 सेकेंड में पूरी की थी।
अब परिवार का अगला लक्ष्य वाणी का नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और फिर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराना है। इसके लिए उसे 195 देशों के झंडों की पहचान सहित निर्धारित अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना होगा। परिवार को विश्वास है कि यह नन्हीं प्रतिभा जल्द ही विश्व स्तर पर बिहार और देश का नाम रोशन करेगी।







