सहरसा शहर के गंगजला वार्ड संख्या-18 में ऋण नहीं चुकाने के मामले में उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने बड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के तहत गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्ज़े की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए सार्वजनिक नोटिस चस्पा कर दिया है। इसके साथ ही आम लोगों को आगाह किया गया है कि बैंक की पूर्व अनुमति के बिना संबंधित संपत्ति की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, किरायेदारी या किसी भी प्रकार का लेन-देन न करें, अन्यथा भविष्य में कानूनी विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगजला निवासी नवीन कुमार और रिंकू कुमारी ने उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक से ऋण लिया था। निर्धारित समय पर ऋण की किस्तें जमा नहीं होने के कारण उनका ऋण खाता डिफॉल्ट की श्रेणी में पहुंच गया। बैंक का कहना है कि उधारकर्ताओं को कई बार नोटिस भेजे गए और भुगतान के लिए पर्याप्त अवसर भी दिया गया, लेकिन बकाया राशि जमा नहीं कराई गई।
बैंक के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार संबंधित ऋण खाते में 21 लाख 96 हजार 891 रुपये की बकाया राशि है। इसी राशि की वसूली के लिए बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के प्रावधानों के तहत संपत्ति पर कब्ज़े की कार्रवाई शुरू की है।
बैंक द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित संपत्ति पर बैंक का वैधानिक अधिकार है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति बैंक की अनुमति के बिना इस संपत्ति से जुड़ा कोई भी लेन-देन करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं उस व्यक्ति की होगी।
इधर, अंचल प्रशासन ने भी बैंक को संपत्ति का भौतिक कब्ज़ा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरी कार्रवाई कानून-व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
बताया जा रहा है कि यदि उधारकर्ता निर्धारित अवधि के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं करते हैं, तो बैंक संपत्ति का मूल्यांकन कर सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसकी नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है। हालांकि फिलहाल नीलामी की कोई तिथि घोषित नहीं की गई है।
यह कार्रवाई उन सभी ऋणधारकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है, जिन्होंने बैंक से ऋण लेकर समय पर किस्तों का भुगतान नहीं किया है। बैंकिंग नियमों के अनुसार डिफॉल्ट की स्थिति में वित्तीय संस्थान गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्ज़ा लेकर कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बकाया राशि की वसूली कर सकते हैं। फिलहाल सहरसा में इस कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा है और लोगों की निगाहें आगे की बैंकिंग प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
— संवाददाता: इन्द्रदेव जी






