बिहार की सियासत में एक बार फिर पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन के बयान ने हलचल तेज कर दी है। सम्राट सरकार द्वारा उनके बेटे चेतन आनंद को उपमंत्री का दर्जा दिए जाने के बावजूद उनकी नाराजगी कम होती नजर नहीं आ रही है। मीडिया से बातचीत के दौरान आनंद मोहन ने साफ शब्दों में कहा कि वे जो भी बोलते हैं, पूरी सोच-समझकर बोलते हैं और अपने बयान पर कायम रहते हैं।
हाल ही में आनंद मोहन ने जेडीयू के कुछ शीर्ष नेताओं और मंत्रियों पर “थैली वाली राजनीति” करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में पद और मंत्री पद उन्हीं लोगों को मिलता है, जो शीर्ष नेतृत्व तक थैली पहुंचाते हैं। इस बयान को लेकर जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हर भौंकने वाले पर आनंद मोहन जवाब नहीं देते हैं।” उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि उनके बयानों को काट-छांटकर पेश न किया जाए और मूल मुद्दों पर फोकस किया जाए।
बेटे चेतन आनंद को उपमंत्री का दर्जा दिए जाने पर भी आनंद मोहन का व्यंग्यात्मक अंदाज देखने को मिला। उन्होंने कहा कि “मैं पहले भी कह चुका हूं कि उपमुख्यमंत्री चुपमुख्यमंत्री होता है, फिर उपमंत्री क्या होता है?” इस बयान के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि वे पार्टी नेतृत्व से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
नई पार्टी बनाने की अटकलों पर भी आनंद मोहन ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। शायराना अंदाज में उन्होंने कहा, “वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है।”
जेडीयू छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि “जिसको छोड़ना है वो छोड़े। जिन लोगों ने नीतीश कुमार की वर्षों की तपस्या पर पानी फेर दिया, वे लोग पार्टी छोड़ें।” उन्होंने दावा किया कि बिहार में एनडीए की नींव उनके अथक प्रयासों से मजबूत हुई थी।
बता दें कि आनंद मोहन इन दिनों जेडीयू के कुछ नेताओं से नाराज बताए जा रहे हैं। उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू सांसद हैं, जबकि बेटे चेतन आनंद पार्टी के विधायक हैं।