बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के एसएमएस-2 विभाग में कार्यरत दिवंगत कर्मी सुभाष चंद्र मोदी के परिजनों के आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। सुभाष चंद्र मोदी की मौत के नौ दिन बाद भी उनका शव बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) की मर्चरी में रखा हुआ है। आश्रित को नौकरी दिए जाने की मांग को लेकर उनकी पत्नी और बेटी पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठी हैं। इसी बीच धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो शनिवार को धरनास्थल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उनकी मांगों को न्यायसंगत बताते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
धरनास्थल पर मौजूद सांसद ढुल्लू महतो ने कहा कि सुभाष चंद्र मोदी की मौत बीएसएल में हुए हादसे के बाद इलाज के दौरान हुई थी। ऐसे मामलों में नियमानुसार मृतक के आश्रित को नौकरी मिलनी चाहिए, लेकिन बीएसएल प्रबंधन अपने स्तर पर नियमों की अलग-अलग व्याख्या कर नियोजन देने से इंकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई नियम न तो संसद से पारित हुआ है और न ही विधानसभा से, जिसके आधार पर आश्रित को नौकरी से वंचित किया जा सके।
सांसद ने कहा कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से उठाएंगे और बीएसएल प्रबंधन के साथ-साथ संबंधित उच्च अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके। उन्होंने विभिन्न ट्रेड यूनियनों से भी इस मामले में आगे आकर परिवार के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।
वहीं, मृतक की पुत्री रीता कुमारी ने बताया कि सांसद ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और अधिकारियों से वार्ता कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक परिवार के एक सदस्य को नियोजन नहीं मिलता, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपने परिवार के अधिकार और न्याय की मांग को लेकर है।
गौरतलब है कि बीएसएल कर्मी की मौत के बाद से परिजन लगातार आश्रित को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। अब इस मामले में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ने से परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद भी मजबूत होती दिखाई दे रही है।
संवाददाता: चंदन सिंह, बोकारो






