NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, कहा- 10 दिनों से मन दुखी है

नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई अनियमितता को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान सामने आया है। CJP के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करते हैं।

 

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इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के नाम एक भावुक पत्र जारी किया है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।”

 

अपने लेटर में उन्होंने NEET परीक्षा में हुई गड़बड़ी का जिक्र करते हुए कहा, “किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पीड़ादायी थी। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले साल से इस परीक्षा को CBT (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।”

 

शिक्षा मंत्री ने आगे लिखा कि इस दौरान सरकार की प्रमुख प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित करना रही। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया, जिसमें केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारों और विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छात्रों, अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को यह पुनर्परीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण हुई।

 

प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से इस पर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।”

 

उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे, जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली।

 

हालांकि उन्होंने अपने मन की व्यथा भी साझा की। प्रधान ने लिखा, “परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ। पिछले 10 दिनों से मन दुखी है।”

 

अंत में उन्होंने कहा कि वह पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं और उनका सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि युवा केवल भारत का भविष्य ही नहीं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।

 

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