दरभंगा: बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा हुए लगभग एक दशक बीत चुका है, लेकिन दरभंगा एम्स का निर्माण अब भी शुरुआती चरण में ही दिखाई दे रहा है। 2015 में केंद्र सरकार ने मिथिलांचल को बड़ी स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से दरभंगा में एम्स स्थापित करने की घोषणा की थी। हालांकि, आज भी परियोजना का मुख्य निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
दरभंगा के सोभन में 187 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस संस्थान के लिए शुरुआत में 1,264 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। बाद में संशोधित लागत बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये हो गई, जो मूल अनुमान से करीब 59 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर 2024 को इसका भूमि पूजन और शिलान्यास किया था।
हाल ही में आरटीआई से सामने आई जानकारी के अनुसार अब तक इस परियोजना पर सिर्फ 19.39 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो कुल संशोधित लागत का 1 प्रतिशत से भी कम है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 21.33 लाख रुपये और 2025-26 में 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। फिलहाल केवल मिट्टी भराई, बाउंड्री और प्रवेश द्वार का निर्माण हुआ है।
विपक्ष ने निर्माण में देरी को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। राजद नेता प्रेमचंद उर्फ भोलू यादव का कहना है कि दरभंगा एम्स चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है। उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों में बाद में स्वीकृत एम्स बनकर चालू भी हो चुके हैं, जबकि दरभंगा में एक दशक बाद भी मुख्य भवन का निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
वहीं भाजपा की राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार जमीन नीची होने के कारण पहले भराई और आधारभूत कार्य किए जा रहे हैं तथा सरकार लगातार इसकी समीक्षा कर रही है।
आरटीआई के जवाब में निर्माण एजेंसी एचएससीसी ने बताया है कि अस्पताल भवन, शैक्षणिक ब्लॉक और आवासीय परिसर समेत प्रमुख संरचनाओं का निर्माण आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद शुरू होगा। एजेंसी ने जुलाई 2029 तक एम्स को चालू करने की संभावना जताई है। हालांकि, अब तक की धीमी प्रगति को देखते हुए इस समयसीमा पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों के मन में संशय बना हुआ है।