भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने उनकी मौत को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। वीडियो में भरत तिवारी अपनी अंतिम इच्छा, शरीर दान और अपने मोबाइल फोन में मौजूद कथित साक्ष्यों को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में भरत तिवारी कहते हैं कि उनकी अंतिम इच्छा है कि मौत के बाद उनके शरीर या अंगों को सबसे पहले भारतीय सेना को दान किया जाए। यदि ऐसा संभव न हो तो प्रशासन या फिर गरीब और असहाय लोगों के हित में उनके शरीर का उपयोग किया जाए। उन्होंने इसे अपने जीवन का त्याग और बलिदान बताते हुए समाज के लिए उपयोगी बनने की इच्छा जताई थी।
सबसे अधिक चर्चा उनके मोबाइल फोन को लेकर दिए गए बयान की हो रही है। भरत ने कहा था कि उनके जाने के बाद उनका मोबाइल माता-पिता के अलावा किसी और के हाथ में नहीं जाना चाहिए। उनका दावा था कि फोन में ऐसे दस्तावेज, जानकारियां और प्रमाण मौजूद हैं जो उनके जीवन और संघर्ष का साक्ष्य हैं। उन्होंने कहा था कि वे हर तरह के सबूत फोन में सुरक्षित रखते हैं ताकि भविष्य में उन्हें मिटाया या झुठलाया न जा सके।
वीडियो में भरत तिवारी तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी सवाल उठाते नजर आते हैं। उन्होंने कहा था कि समाज और राज्य के लिए त्याग व बलिदान की बातें केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि वे किसी दबाव, प्रलोभन या धमकी के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
एनकाउंटर के बाद सामने आए इस वीडियो को लेकर परिजन और ग्रामीण मोबाइल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि फोन में मौजूद सामग्री मामले की सच्चाई सामने ला सकती है। इस बीच राज्य सरकार की ओर से न्यायिक जांच की घोषणा की गई है।
वहीं, पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में भरत तिवारी के पिता, भाई और पंचायत मुखिया समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिससे गांव में नाराजगी बढ़ गई है।
हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में किए गए दावे भरत तिवारी के व्यक्तिगत बयान हैं। मोबाइल में मौजूद कथित साक्ष्यों और एनकाउंटर से जुड़े तथ्यों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






