5 साल की आन्या का बड़ा सपना: रोज 500 गेंदों की प्रैक्टिस, लक्ष्य भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ब्लू जर्सी

पटना के अनीसाबाद की महज पांच वर्षीय आन्या सिंह अपनी उम्र से कहीं बड़े सपने देख रही है। जहां अधिकांश बच्चे खिलौनों और मोबाइल गेम्स में व्यस्त रहते हैं, वहीं आन्या रोजाना करीब 500 गेंदों का सामना कर क्रिकेट में अपना भविष्य संवार रही है। उसका सपना एक दिन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ब्लू जर्सी पहनना है।

 

आन्या का दिन सुबह साढ़े पांच बजे से शुरू होता है। सुबह क्रिकेट अकादमी में अभ्यास, फिर स्कूल और शाम को घर की छत पर घंटों बल्लेबाजी उसका रोज का कार्यक्रम है। पिछले दो वर्षों से वह लगातार 6 से 7 घंटे अभ्यास कर रही है। उसके पिता चंदन सिंह ने घर की छत को मिनी क्रिकेट स्टेडियम में बदल दिया है, जहां नेट, प्रैक्टिस पिच, वॉटर स्प्रिंकलर और स्टैंड फैन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

 

आन्या भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को अपना आदर्श मानती है। उसे आक्रामक बल्लेबाजी पसंद है और वह भी उसी अंदाज में खेलना चाहती है। उसके पास 200 से अधिक टेनिस, प्लास्टिक, सिंथेटिक और लेदर गेंदें हैं, जिनसे वह रोज अभ्यास करती है।

 

पिता चंदन सिंह बताते हैं कि उन्होंने बेटी के जन्म से पहले ही तय कर लिया था कि अगर बेटी होगी तो उसे क्रिकेटर बनाएंगे। ढाई-तीन साल की उम्र से उन्होंने आन्या को क्रिकेट सिखाना शुरू किया। शुरुआती महीनों में केवल शैडो प्रैक्टिस कराई गई और अब वह आधुनिक क्रिकेट के अनुरूप बल्लेबाजी सीख रही है। आन्या की ताकत बढ़ाने के लिए छत पर पुराने कार टायरों से भी अभ्यास कराया जाता है।

 

चंदन सिंह का कहना है कि वह खुद रोज 200 से 250 गेंद फेंकते हैं, जबकि प्रशिक्षक करीब 300 गेंदों का अभ्यास कराते हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ी बनाने के लिए सिर्फ बच्चे की नहीं, पूरे परिवार की तपस्या जरूरी होती है। यही कारण है कि परिवार ने सामाजिक कार्यक्रमों से भी दूरी बना ली है ताकि आन्या की प्रैक्टिस कभी न रुके।

 

महज पांच साल की उम्र में अनुशासन, समर्पण और मेहनत की मिसाल बनी आन्या सिंह अब बिहार ही नहीं, भारतीय महिला क्रिकेट की नई उम्मीद के रूप में देखी जा रही है।

 

संवाददाता: ब्यूरो रिपोर्ट पटना

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