बिहार में दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। घरों में दीप जल रहे हैं, बाजारों में रौनक है और लोग अपने परिवार के साथ खुशियां बांट रहे हैं। लेकिन राज्य के कई सरकारी कर्मचारियों के लिए इस बार दीपावली की खुशी फीकी पड़ गई। वजह है अक्टूबर महीने का वेतन, जो दीपावली के दिन तक भी कई कर्मचारियों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सका।
दरअसल, त्योहार को देखते हुए बिहार सरकार ने सभी विभागों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों पर किसी भी सरकारी कर्मचारी को वेतन के लिए परेशान नहीं होना पड़े। इसके लिए लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने और जरूरत पड़ने पर शनिवार तथा छुट्टी के दिनों में भी कार्यालय खोलने को कहा गया था।
मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर भुगतान की स्थिति की समीक्षा भी की थी। इसके बावजूद दीपावली के दिन तक शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग समेत कई विभागों के कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन नहीं मिल सका।
वेतन में देरी से कर्मचारियों के त्योहार का बजट भी बिगड़ गया। दीपावली पर मिठाई, कपड़े, पूजा सामग्री और घर की सजावट जैसी तैयारियों के लिए कर्मचारियों ने वेतन मिलने की उम्मीद लगाई थी। लेकिन खाते में पैसा नहीं पहुंचने से कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इस मामले को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बिहार सरकार पर हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया के माध्यम से HRMS पोर्टल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। आरजेडी ने पूछा है कि जब मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश दिए थे, तो आखिर कर्मचारियों को समय पर वेतन क्यों नहीं मिला?
हालांकि, HRMS पोर्टल में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब सवाल यह है कि मुख्य सचिव के निर्देश के बावजूद वेतन भुगतान में देरी क्यों हुई? इसके लिए जिम्मेदार कौन है और कर्मचारियों के खाते में अक्टूबर महीने की सैलरी कब तक पहुंचेगी? फिलहाल कर्मचारियों को सरकार की ओर से राहत मिलने का इंतजार है।





