भागलपुर । बिहार के भागलपुर जिले में सड़कों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी, भागलपुर के निर्देश पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों की भौतिक स्थिति की जांच के लिए जांच पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सड़क संपर्कता बेहतर बनाना, यातायात को सुगम करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जारी आदेश के अनुसार, पथ प्रमंडल, भागलपुर और इसके अंतर्गत आने वाले संबंधित उप प्रमंडलों की विभिन्न सड़कों की स्थलीय जांच की जाएगी। इसमें भागलपुर, नवगछिया, कहलगांव और सुल्तानगंज क्षेत्र की प्रमुख सड़कें शामिल हैं। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि सरकारी निधि से निर्मित और अनुरक्षित सड़कों की स्थिति कैसी है तथा उनमें कहां-कहां मरम्मत और सुधार की जरूरत है।
सड़क के गड्ढों से लेकर पुल-पुलिया तक की होगी जांच
जांच पदाधिकारी सड़कों पर बने गड्ढों, क्षतिग्रस्त हिस्सों, सड़क की सतह पर धंसाव, रटिंग और दरारों की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। इसके साथ ही सड़क किनारे बने शोल्डर, किनारों की मजबूती और दरारों की सीलिंग की भी जांच की जाएगी।
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संकेतक बोर्ड, क्रैश बैरियर और सड़क चिह्नांकन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की सफाई, पुल-पुलिया की मरम्मत एवं साफ-सफाई और जलजमाव की समस्या को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इन बिंदुओं के आधार पर सड़कों की कमियों को चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
27 अक्टूबर तक जमा करनी होगी रिपोर्ट
जिलाधिकारी ने प्रतिनियुक्त जांच पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 27 अक्टूबर 2026 तक आवंटित सड़कों की स्थलीय जांच पूरी कर अपना प्रतिवेदन जिला विकास शाखा, भागलपुर में उपलब्ध कराएं। जांच रिपोर्ट के साथ संबंधित सड़कों की तस्वीरें भी संलग्न करनी होंगी, ताकि सड़क की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
जिला विकास शाखा को प्राप्त सभी जांच प्रतिवेदनों को समेकित कर 28 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी के समक्ष निर्णय के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल एवं पथ निर्माण विभाग को जांच पदाधिकारियों को आवश्यक तकनीकी जानकारी और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है।
प्रशासन की इस पहल से सड़कों की खामियों की पहचान कर उनके निराकरण के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सड़क मरम्मत और अनुरक्षण कार्यों में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।






