भारत में घटते पेड़ और बढ़ती गर्मी का खतरा, जानिए इंसानों को कितने पेड़ों की जरूरत
पेड़ों को इंसानों की लाइफलाइन कहा जाता है, क्योंकि सांस लेने से लेकर प्रदूषण कम करने तक उनकी भूमिका बेहद अहम है। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को सालभर में करीब 740 किलोग्राम ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जिसके लिए लगभग 7 से 8 पेड़ जरूरी माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की औसत उम्र 60 वर्ष मानी जाए तो उसे पूरी जिंदगी में करीब 480 पेड़ों की आवश्यकता पड़ती है।
रिपोर्टों के मुताबिक भारत में लगभग 35 अरब पेड़ हैं और देश की 147 करोड़ से ज्यादा आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति सिर्फ 24 से 28 पेड़ ही उपलब्ध हैं। यह संख्या वैश्विक औसत 422 पेड़ों से काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांस लेने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रित रखने के लिए प्रति व्यक्ति कम से कम 80 से 100 पेड़ों की जरूरत है।
हालांकि भारत में वन और वृक्ष आवरण बढ़ा है, फिर भी देश भीषण गर्मी और प्रदूषण की मार झेल रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह अनियंत्रित शहरीकरण, जंगलों की कटाई और ग्रीनहाउस गैसों में लगातार बढ़ोतरी है। कंक्रीट की इमारतें और डामर की सड़कें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में उसे छोड़ती हैं, जिससे शहरों में “अर्बन हीट आइलैंड” प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर इसका बड़ा उदाहरण हैं।
संयुक्त राष्ट्र और विश्व मौसम विज्ञान संगठन की रिपोर्टों के अनुसार आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयला, पेट्रोलियम और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों का बढ़ता उपयोग जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण है। वहीं जंगलों की कटाई से वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड तेजी से बढ़ रही है।
पेड़ केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि कार्बन डाइऑक्साइड और जहरीली गैसों को भी सोखते हैं। यही कारण है कि पर्यावरण विशेषज्ञ बड़े पैमाने पर पौधरोपण को समय की सबसे बड़ी जरूरत मान रहे हैं। भारत सरकार भी “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के जरिए करोड़ों पौधे लगाने का दावा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते हरियाली नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले वर्षों में गर्मी, प्रदूषण और जलवायु संकट और भयावह हो सकता है।