गया में बिजली विभाग पर रिश्वतखोरी का आरोप: डीएम की जांच में फंसे जेई-एई, निलंबन और विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा


बिहार के गया जिले में बिजली विभाग के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी और कथित फर्जी बिजली चोरी का मामला दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की पहल पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि होने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

मामला इमामगंज प्रखंड के मंझौली गांव निवासी एवं आइस फैक्ट्री संचालक उमेश साव की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि बिजली विभाग की टीम ने उनकी फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान उन पर अवैध रूप से टोका लगाकर बिजली चोरी करने का आरोप लगाया, जबकि उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह गलत बताया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि मामले को रफा-दफा करने के लिए उनसे रिश्वत की मांग की गई थी।

शिकायत मिलने के बाद डीएम शशांक शुभंकर ने शेरघाटी के अनुमंडल पदाधिकारी को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा। जांच के दौरान बिजली विभाग की ओर से बिजली चोरी के आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि जूनियर इंजीनियर सचिन कुमार ने विभागीय लेखापाल रंजीत कुमार के बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से 20 हजार रुपये मंगवाए थे।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता से कुल 50 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कनीय अभियंता सचिन कुमार, सहायक अभियंता राजीव झा, लेखापाल रंजीत कुमार, मानव बल कर्मी संजय पासवान तथा सुपरवाइजर विक्रम सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की है।

जिला पदाधिकारी ने अधीक्षण अभियंता को जेई सचिन कुमार के निलंबन का प्रस्ताव विभाग को भेजने का निर्देश दिया है। वहीं अन्य संबंधित कर्मियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। जांच के दौरान एक लाइनमैन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, जिसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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