नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर, रंगरा, खरीक, बिहपुर, नारायणपुर और इस्माइलपुर थाना क्षेत्रों में इन दिनों गंगा व कोसी नदी के विभिन्न घाटों पर अवैध बालू खनन धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में भारी मशीनों और ट्रैक्टरों के जरिए बड़े पैमाने पर सफेद बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है। इससे सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है, वहीं तटवर्ती गांवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बालू कारोबारी दिन-रात सक्रिय रहते हैं और बिना वैध चालान के दर्जनों ट्रैक्टर विभिन्न इलाकों में बालू पहुंचा रहे हैं। कई घाटों पर नदी की धारा के बेहद करीब तक खुदाई कर दी गई है, जिससे कटाव का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों को आशंका है कि आने वाले बरसात के मौसम में इसका गंभीर असर नदी किनारे बसे गांवों पर पड़ सकता है।
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ई. गौतम कुमार ने भी माना कि गांवों के नजदीक बड़े पैमाने पर बालू खनन से कटाव का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन के कारण गंगा व कोसी घाटों की प्राकृतिक संरचना तेजी से बिगड़ रही है। कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने से नाव परिचालन और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
हालांकि प्रशासन की ओर से समय-समय पर छापेमारी कर अवैध खनन पर रोक लगाने की कोशिश की जाती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अनियंत्रित बालू खनन से नदी की धारा बदल सकती है, कटाव बढ़ सकता है और जैव विविधता पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


