बेगूसराय की बेटी रिया कुमारी ने बढ़ाया बिहार का मान, कॉमनवेल्थ कबड्डी में भारत को दिलाया गोल्ड

बेगूसराय: कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मंजिल पाने का जुनून हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। इसे सच कर दिखाया है बेगूसराय की बेटी रिया कुमारी ने। कॉमनवेल्थ गेम्स की कबड्डी प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम को स्वर्ण पदक दिलाकर रिया जब अपने घर लौटीं, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों के साथ लोगों ने उनका अभिनंदन किया और पूरे इलाके में खुशी का माहौल देखने को मिला।

बीहट नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 29 स्थित जागीर टोला, रतन चौक की रहने वाली रिया 14 सदस्यीय भारतीय महिला कबड्डी टीम में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र खिलाड़ी थीं। टीम की मजबूत डिफेंस में उनकी अहम भूमिका रही।

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साधारण किसान परिवार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

रिया के पिता सिकंदर सिंह किसान हैं, जबकि मां वैजयंती देवी गृहिणी हैं। वर्ष 2015 में रिया ने गांव की मिट्टी से कबड्डी खेलने की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्हें सामाजिक सोच और लोगों के तानों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण परिवेश में लड़कियों का खेलना कई लोगों को पसंद नहीं था, लेकिन रिया ने हार नहीं मानी।

उन्होंने गर्ल्स स्कूल बीहट के मैदान में सीनियर महिला खिलाड़ियों के साथ अभ्यास किया और लगातार अपनी प्रतिभा को निखारती रहीं। कठिन मेहनत और अनुशासन के दम पर उन्होंने कबड्डी में अपनी पहचान बनाई।

रिया एशियन गेम्स, वर्ल्ड कप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए आयोजित पांच राष्ट्रीय कैंपों में भी हिस्सा ले चुकी हैं। जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया है।

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना अगला लक्ष्य

रिया अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, स्पोर्टिंग क्लब बीहट के चेयरमैन श्याम नंदन सिंह पन्नालाल और बिहार राज्य कबड्डी संघ के चेयरमैन कुमार विजय सहित खेल जगत से जुड़े लोगों को देती हैं।

रिया ने बीहट को कबड्डी की नर्सरी बताते हुए कहा कि यहां की दर्जनों लड़कियां खेल के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल कर चुकी हैं।

कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद अब रिया का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उनका संदेश है कि बेटियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। रिया की उपलब्धि आज पूरे बेगूसराय और बिहार के लिए गर्व की बात है।

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