
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने और समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को बुनियाद केंद्र, कहरा सदर, सहरसा में जागरूकता एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जेंडर इक्वालिटी एवं बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का संयुक्त संचालन जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ वीमेन कार्यालय, सहरसा एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), सहरसा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में बाल विवाह के दुष्परिणामों, बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कम उम्र में विवाह होने से विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता प्रभावित होती है।
इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पारा विधिक स्वयंसेवकों (PLV) एवं अधिवक्ताओं ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। इसके लिए जरूरी है कि लोग जागरूक हों और कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर समय रहते संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।
कार्यक्रम में उपस्थित आंगनबाड़ी सेविकाओं, महिला पर्यवेक्षिकाओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों एवं अधिवक्ताओं सहित सभी प्रतिभागियों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे न तो बाल विवाह करेंगे और न ही अपने आसपास ऐसा होने देंगे। साथ ही परिवार, गांव और समाज में लोगों को जागरूक कर इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम का प्रबंधन जिला मिशन समन्वयक, जिला हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ वीमेन, सहरसा द्वारा किया गया।
इस आयोजन के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया कि बेटियों को शिक्षा, समान अवसर और सुरक्षित भविष्य देना ही सशक्त समाज की पहचान है। बाल विवाह मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हर व्यक्ति इस मुहिम का हिस्सा बनेगा।





