मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में 167 ICT इंस्ट्रक्टरों को काम से हटाए जाने का मामला सामने आया है। इन कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे सरकारी स्कूलों में लगातार आठ महीने तक काम कराया गया, लेकिन एक रुपये का भी मानदेय नहीं दिया गया। अब अचानक उनकी नियुक्ति समाप्त कर दी गई है। इससे कर्मचारियों के सामने रोजगार और परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
दरअसल, सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ICT लैब स्थापित की गई थी। इसके संचालन और विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए ICT इंस्ट्रक्टरों की नियुक्ति की गई थी। पूर्वी चंपारण जिले के अलग-अलग विद्यालयों में कुल 167 इंस्ट्रक्टर काम कर रहे थे।
कर्मचारियों के मुताबिक, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान की ओर से 7 मार्च 2026 को प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी किया गया था। इसमें विस्तार विजन, पटना की ओर से चयनित इंस्ट्रक्टरों का योगदान स्वीकार करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद विद्यालयों में उनसे काम लिया गया।
लेकिन करीब आठ महीने बाद उनकी नियुक्ति समाप्त कर दी गई। इसी के विरोध में शुक्रवार को सभी ICT इंस्ट्रक्टर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने दोबारा नियुक्ति देने और आठ महीने के बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग उठाई।
इंस्ट्रक्टर मंतोष कुमार ने बताया कि वे यू-डायस, ऑनलाइन कार्यों के साथ स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी भी निभाते थे। बीआरसीसी कार्यालय में भी उनसे काम लिया जाता था। अब त्योहार के समय वेतन नहीं मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने कहा कि न तो उनके स्तर से इनकी नियुक्ति की गई है और न ही हटाया गया है। कर्मचारियों को संबंधित एजेंसी से संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल 167 ICT इंस्ट्रक्टर अपनी मांगों को लेकर विभाग और एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। अब सवाल है कि आठ महीने तक काम करने वाले इन कर्मचारियों के बकाया मानदेय का भुगतान आखिर कौन करेगा?






