रोशनी के पर्व दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर सहरसा के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। त्योहार की खुशियां घर-आंगन तक पहुंचाने के लिए लोग सुबह से देर शाम तक बाजारों में खरीदारी करते नजर आए। शहर के मुख्य बाजार शंकर चौक पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। हालांकि, रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के कारण सड़क पर जगह की कमी होने से लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ा। वाहनों और पैदल चलने वालों की बढ़ती भीड़ के कारण बाजार क्षेत्र में आवागमन प्रभावित रहा। वहीं, शहर के अन्य बाजारों में भी दिनभर खरीदारों की चहल-पहल बनी रही।
एक तरफ बाजारों में त्योहार की रौनक है, तो दूसरी तरफ मिट्टी के दीये और पारंपरिक बर्तन बनाने तथा बेचने वाले कुम्हारों के चेहरे पर मायूसी नजर आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो महीनों से वे दीपावली को ध्यान में रखते हुए मिट्टी के दीये तैयार कर रहे हैं, लेकिन बाजार में चाइनीज झालरों और तरह-तरह के आकर्षक इलेक्ट्रॉनिक दीयों की उपलब्धता के कारण मिट्टी के दीयों की मांग काफी कम हो गई है। उनका कहना है कि बिक्री इतनी कम है कि परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। मेहनत और लागत के बावजूद अपेक्षित आमदनी नहीं हो पा रही है।
वहीं, छठ पूजा की खरीदारी करने पहुंचे ग्राहकों ने भी महंगाई को लेकर अपनी परेशानी जाहिर की। लोगों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार पूजा से जुड़ी लगभग सभी सामग्रियों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। ग्राहकों के अनुसार, पिछले साल जहां सूप का एक जोड़ा करीब 100 रुपये में मिल जाता था, वहीं इस बार इसके लिए 150 रुपये से अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। अन्य पूजा सामग्रियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
कुल मिलाकर, सहरसा के बाजारों में त्योहार को लेकर उत्साह और रौनक तो खूब है, लेकिन महंगाई और पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों की घटती मांग ने आम ग्राहकों के साथ छोटे दुकानदारों की चिंता भी बढ़ा दी है।






