बिहार के सहरसा से एक खबर सामने आई है, जहां टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में कार्यरत सफाईकर्मी पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिलने के आरोप को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दशहरा का त्योहार नजदीक है, लेकिन अब तक वेतन का भुगतान नहीं होने से सफाईकर्मियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मजदूरों का कहना है कि वे अपने बकाया वेतन के लिए लगातार संबंधित एजेंसी और कॉलेज प्रबंधन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिल रहा है। प्रदर्शन कर रहे सफाईकर्मियों ने चेतावनी दी है कि अगर दो दिनों के भीतर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।सहरसा के टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में सफाई का काम करने वाले मजदूरों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। दशहरा का त्योहार सिर पर है, लेकिन मेहनत की कमाई नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
सहरसा के टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में सफाई का काम करने वाले मजदूरों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। दशहरा का त्योहार सिर पर है, लेकिन मेहनत की कमाई नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
सफाईकर्मियों का कहना है कि वे अपनी समस्या को लेकर कभी संबंधित एजेंसी के कार्यालय तो कभी कॉलेज प्रबंधन के पास पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। मजदूरों के मुताबिक, उन्हें हर बार वेतन भुगतान का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक बकाया राशि उनके खाते में नहीं पहुंची है।
वेतन नहीं मिलने से नाराज सफाईकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और जल्द से जल्द बकाया राशि का भुगतान करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, कुछ सफाईकर्मियों ने उन्हें ड्यूटी से हटाए जाने का भी आरोप लगाया है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अगले दो दिनों के भीतर उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
अब देखना होगा कि दशहरा से पहले सफाईकर्मियों की इस समस्या का समाधान होता है या फिर उन्हें अपने हक के लिए आंदोलन को और तेज करना पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें कॉलेज प्रबंधन और संबंधित एजेंसी के अगले कदम पर टिकी हैं।






