गया में पेंसिल के छिलकों से सजेगा मां दुर्गा का दरबार, 50 हजार पेंसिल से बनेगी अनोखी प्रतिमा

बिहार के गया में इस बार दुर्गा पूजा के दौरान आस्था, पर्यावरण संरक्षण और अनूठी कला का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यहां एक ऐसे कलाकार मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं, जो पेंसिल के छिलकों, इरेज़र और शार्पनर से बनाई जा रही है। खास बात यह है कि इस अनोखी कलाकृति में न तो मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है और न ही किसी रंग का। गया के मूर्तिकार विक्की बिंदु की यह रचनात्मक पहल लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले के रहने वाले विक्की बिंदु पेशे से इंजीनियर रह चुके हैं, लेकिन आज अपनी पुश्तैनी मूर्तिकला को नई पहचान दे रहे हैं। इस बार उन्होंने बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले पेंसिल के छिलकों से मां दुर्गा का भव्य दरबार सजाने का फैसला किया है।

Sponsored Advertisement

विक्की बिंदु के मुताबिक, पढ़ाई के दौरान बच्चों को पेंसिल छीलते देखकर उनके मन में यह अनोखा विचार आया। उन्होंने सोचा कि जिन छिलकों को लोग कचरा समझते हैं, उनसे भी एक खूबसूरत कलाकृति बनाई जा सकती है।

प्रतिमा तैयार करने के लिए सबसे पहले कागज से अंदरूनी ढांचा बनाया गया। इसके बाद पेंसिल के छिलकों को बारीकी से चिपकाकर मां दुर्गा का स्वरूप उभारा जा रहा है। वहीं, शार्पनर, रंगीन पेंसिल और इरेज़र की मदद से प्रतिमा के कपड़े और शृंगार को आकार दिया जा रहा है। मां दुर्गा के साथ गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिकेय, महिषासुर और शेर की प्रतिमाएं भी इसी तकनीक से बनाई जा रही हैं।

इस पूरी कलाकृति को तैयार करने में पिछले डेढ़ महीने से पांच मुख्य कारीगर जुटे हैं। वहीं, पेंसिल छीलकर छिलके तैयार करने में आठ से दस लोग और बच्चे भी सहयोग कर रहे हैं। अब तक 15 से 20 हजार पेंसिल का इस्तेमाल हो चुका है। अनुमान है कि निर्माण पूरा होने तक 50 हजार से अधिक पेंसिल लगेंगी, जिनकी कीमत करीब एक लाख रुपये है।

कभी बिजली विभाग में साइट इंजीनियर और पटना में टेक्निकल ऑफिसर रहे विक्की बिंदु ने कोरोना काल में नौकरी छूटने और पिता के निधन के बाद पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने का फैसला किया। पिछले दस वर्षों से वह अलग-अलग सामग्रियों से अनूठी प्रतिमाएं बना रहे हैं।

गया के फतेहगंज की पूजा समिति के ऑर्डर पर तैयार हो रही यह प्रतिमा इस बार दुर्गा पूजा में आकर्षण का केंद्र बनने के साथ ही बेकार वस्तुओं के रचनात्मक इस्तेमाल का संदेश भी देगी।

Related Posts

शिवहर में कलश यात्रा के दौरान बड़ा हादसा, रथ का ब्रेक फेल होने से 15 लोग घायल

शिवहर में कलश यात्रा के दौरान बड़ा हादसा, रथ का ब्रेक फेल होने से 15 लोग घायल

मुजफ्फरपुर में वेश्यालय के आंगन की मिट्टी से बनती है मां दुर्गा की प्रतिमा, सदियों पुरानी परंपरा में छिपा सामाजिक समानता का संदेश

मुजफ्फरपुर में वेश्यालय के आंगन की मिट्टी से बनती है मां दुर्गा की प्रतिमा, सदियों पुरानी परंपरा में छिपा सामाजिक समानता का संदेश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *