सहरसा: जिले के महपुरा स्थित प्रसिद्ध संत बाबा कारू खिरहर मंदिर पावन धाम में आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बुधवार को ग्रामीणों, अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने एसडीएम श्रेयांश तिवारी के कार्यालय में बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीणों के सहयोग से परंपरागत तरीके से मेले का आयोजन किया जाएगा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।
महासप्तमी के दिन बाबा कारू खिरहर मंदिर में विशेष दुग्धाभिषेक का आयोजन होता है। बिहार समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पशुपालक और श्रद्धालु अपनी गायों का पहला दूध बाबा को अर्पित करने मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता है कि महासप्तमी के दिन इतनी बड़ी मात्रा में दूध चढ़ाया जाता है कि मंदिर परिसर से दूध की धारा निकलकर कोसी नदी में मिल जाती है। श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि इससे कुछ समय के लिए कोसी नदी का पानी सफेद दिखाई देने लगता है।
मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दूध, चावल और चीनी से महाप्रसाद के रूप में खीर तैयार की जाती है। महासप्तमी के दिन मंदिर परिसर में दिन-रात खीर तैयार होती है और आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भंडारे के रूप में इसका वितरण किया जाता है।
बाबा कारू खिरहर को भगवान शिव का अनन्य भक्त और लोकदेवता माना जाता है। महासप्तमी के मौके पर बड़ी संख्या में माताएं और दंपत्ति संतान प्राप्ति, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना लेकर पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं।
हालांकि, कुछ दिन पहले हुई घटना और मंदिर के महंथ की गिरफ्तारी के बाद इस बार मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि मेले के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और श्रद्धालु शांतिपूर्ण माहौल में बाबा के दर्शन कर सकें।





