
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु को स्थायी रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाने की दिशा में 1 अक्टूबर 2026 से बेली ब्रिज हटाने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। 30 सितंबर की मध्य रात्रि से ही पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद कर बैरिकेडिंग कर दी गई है। अब बेली ब्रिज को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। इस पूरे कार्य की निगरानी बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की 80 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम कर रही है।
बेली ब्रिज को हटाने के लिए निर्माण के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया के ठीक विपरीत क्रम यानी रिवर्स सीक्वेंस का इस्तेमाल किया जाएगा। क्रेन और पुल इरेक्शन मशीनों की मदद से सबसे पहले डेक को हटाया जाएगा। इसके बाद क्रॉसबीम और ब्रेसिज को एक-एक कर अलग किया जाएगा। अंतिम चरण में ट्रस सेक्शन और कनेक्टिंग पिन्स को सावधानीपूर्वक निकाला जाएगा।
स्टील के ढांचे को हटाने के बाद हेली कटर की मदद से पुल के स्लैब को काटा जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ इंजीनियर पुल के पायों और कंक्रीट फ्रेम की तकनीकी जांच करेंगे। जांच के आधार पर आगे की मरम्मत और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
बेली ब्रिज हटने के बाद इसकी जगह करीब 99 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज और नए कंक्रीट स्लैब का निर्माण किया जाना है। मरम्मत और निर्माण कार्य के चलते विक्रमशिला सेतु को 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह बंद रखने की योजना है। लक्ष्य है कि नए साल 2027 से पुल पर दोबारा वाहनों का परिचालन शुरू किया जा सके।
पुल बंद होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए गंगा नदी में मुफ्त फेरी सेवा शुरू की गई है। अलग-अलग क्षमता वाले जहाजों में करीब 72 से लेकर 600 यात्रियों तक के सफर की व्यवस्था है। यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। इस वैकल्पिक व्यवस्था से पुल बंद रहने के दौरान लोगों को नदी मार्ग से आवागमन की सुविधा मिलेगी।





