सहरसा। नवहट्टा प्रखंड क्षेत्र में कोसी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के कारण कई पंचायतों के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। बाढ़ से प्रभावित नौला, बकुनिया, केदली, डरहार, हाटी, शाहपुर और सत्तौर पंचायतों के कई इलाकों में पानी घुस चुका है। केदली में दर्जनों घरों के पूरी तरह जलमग्न होने की बात सामने आई है, जबकि डरहार पंचायत के महुवा गांव और पावर सब-स्टेशन तक जाने वाली सड़कें पानी में डूबी हुई हैं। सत्तौर में तेज बहाव के कारण ग्रामीण सड़कों के कटकर बह जाने की स्थिति बनी रहती है।
इसी बीच नवहट्टा प्रखंड कार्यालय में बाढ़ पीड़ित दर्जनों महिला-पुरुषों के रातभर बैठे रहने का मामला सामने आया है। बताया गया कि बाढ़ पीड़ितों को प्रखंड स्तर पर प्लास्टिक उपलब्ध कराए जाने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण सुबह करीब 10 बजे प्रखंड कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अंचलाधिकारी से प्लास्टिक के साथ-साथ बाढ़ राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान ग्रामीणों से आधार कार्ड जमा लिया गया और उन्हें कार्यालय में रुकने के लिए कहा गया।
ग्रामीणों के अनुसार, शाम करीब सात बजे उन्हें अपने-अपने घर लौटने के लिए कहा गया और अगले दिन प्लास्टिक देने की बात कही गई। ग्रामीणों का कहना है कि शाम होने के बाद उनके इलाके में बाढ़ का पानी भरा हुआ है और कई जगह नाव की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके लिए वापस घर जाना मुश्किल था।
रात में स्थानीय युवाओं को जब इसकी जानकारी मिली कि दर्जनों बाढ़ पीड़ित भूखे-प्यासे प्रखंड कार्यालय में बैठे हैं, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था की।
वहीं स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि यदि प्रखंड कार्यालय में प्लास्टिक की व्यवस्था नहीं थी तो बाढ़ पीड़ितों को घंटों रोककर क्यों रखा गया? साथ ही, यदि उन्हें रात में रुकना पड़ा तो उनके भोजन और रहने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से क्यों नहीं की गई?
स्थानीय युवाओं के अनुसार, जब अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो बताया गया कि ग्रामीणों को जाने के लिए कहा गया था, लेकिन वे स्वयं वहां बैठे हुए हैं। अब पूरे मामले में प्रशासन की व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।





