भागलपुर। सबौर प्रखंड के मीराचक में बाढ़ ने हालात को बेहद भयावह बना दिया है। कभी आबाद रहने वाला यह इलाका अब चारों तरफ पानी से घिरा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में करीब 12 से 15 फीट तक पानी जमा है, जिसके कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक परिवार ने अपने घर में ही छोटी नाव तैयार कर रखी है। इसी नाव के सहारे बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया जा रहा है। पानी से घिरे इलाके में आवागमन लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए भी नाव के सहारे ही बाहर निकलना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित परिवारों तक दवाई, राशन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, गहरे पानी के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी आसान नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी में उतरना बेहद जोखिम भरा है और थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, मीराचक इलाके में जमीन की कीमत करीब 25 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जाती है, लेकिन बाढ़ के दौरान यही आबाद इलाका कई फीट गहरे पानी में डूब जाता है। लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ की स्थिति में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
वहीं, फरारी पंचायत के मुखिया जागरण पासवान ने बताया कि गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाया गया है, लेकिन कई लोग वहां तक पहुंच नहीं पा रहे हैं। राहत शिविर तक जाने वाला रास्ता काफी संकरा है, जिसके कारण बड़ी नाव का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।
मुखिया ने यह भी बताया कि छोटी डेंगी के संचालन की प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने से राहत और आवागमन के काम में परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से सुरक्षित स्थान पर पहुंचने और राहत शिविर में जाने की अपील की है।
फिलहाल मीराचक में बाढ़ का संकट गंभीर बना हुआ है। ग्रामीणों को प्रशासन से सुरक्षित आवागमन और राहत व्यवस्था को और बेहतर करने की उम्मीद है।






