नालंदा: शिक्षा और विज्ञान की रोशनी से समाज में फैले अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर करने की मुहिम चला रहे नालंदा के तीन शिक्षकों को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान ‘प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा, छत्तीसगढ़’ की ओर से आयोजित राष्ट्रीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम में दिया गया।
सम्मान पाने वालों में बिहार शरीफ के प्राथमिक विद्यालय बेलदरिया के प्रधान शिक्षक रोहित कुमार, शीतला प्लस-2 उच्च विद्यालय मघड़ा के शिक्षक डॉ. मो. एजाज अहमद और उर्दू प्राथमिक विद्यालय कोहनासराय के विशिष्ट शिक्षक मो. नजमुद्दीन शामिल हैं।
तीनों शिक्षक स्कूलों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और अंधविश्वास से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। उनका खास फोकस बच्चों और अभिभावकों को उन बातों की वैज्ञानिक वजह समझाने पर है, जिन्हें अक्सर चमत्कार या दैवीय शक्ति से जोड़ दिया जाता है।
डॉ. मो. एजाज अहमद बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कई लोग ढोंगी बाबाओं के झांसे में आ जाते हैं। उन्होंने नींबू लाल होने का उदाहरण देते हुए बताया कि रासायनिक प्रतिक्रिया के जरिए ऐसी चीजों को चमत्कार जैसा दिखाया जा सकता है। उनका कहना है कि बच्चों को विज्ञान समझाया जाए तो वे अपने परिवारों में भी अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैला सकते हैं।
वहीं रोहित कुमार ने 2010 में नेहरू युवा केंद्र से जुड़कर समाजसेवा की शुरुआत की। शिक्षक बनने के बाद उन्होंने बाल विवाह, अंधविश्वास और पर्यावरण संरक्षण के खिलाफ कई राज्यों में अभियान चलाया। उनके अनुसार, परिवार में हुई दुखद घटनाओं के बाद भी उन्होंने वैज्ञानिक सोच का सहारा लेकर अंधविश्वास का सामना किया।
तीनों शिक्षक स्कूलों में बैगलेस शनिवार के दौरान बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करते हैं। वे जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए कॉपी, किताब और अन्य जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं।
इन शिक्षकों का संदेश साफ है—किसी भी घटना को चमत्कार मानने से पहले उसके पीछे का वैज्ञानिक कारण समझना जरूरी है। शिक्षा और तर्क के जरिए ही अंधविश्वास की जड़ों को कमजोर किया जा सकता है।






