
बिश्रामपुर। पलामू जिले के बिश्रामपुर प्रखंड अंतर्गत घासीदाग पंचायत का राजखाड़ गांव आजादी के 80 वर्ष बाद भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहा है। धुरिया नदी और जंगल से घिरे इस गांव के ग्रामीणों के लिए बरसात का मौसम हर साल परेशानी लेकर आता है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है और आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, राजखाड़ में प्राथमिक विद्यालय संचालित है, लेकिन बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने के लिए धुरिया नदी पार करनी पड़ती है। सामान्य दिनों में किसी तरह नदी पार कर आवागमन संभव हो जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर के बीच नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की आवाजाही पर पड़ता है।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब रात के समय गांव में किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाती है। ग्रामीणों को मरीज को खाट पर लिटाकर नदी पार कराने की मजबूरी होती है। ऐसे में समय पर इलाज मिलना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि धुरिया नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई गई है। पलामू उपायुक्त को भी आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया गया। इसके बाद अधिकारियों की टीम ने गांव पहुंचकर स्थल का निरीक्षण और नापी की थी। इससे ग्रामीणों को पुल निर्माण की उम्मीद जगी, लेकिन नापी के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अखबारों और सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस समस्या को उठाया जा रहा है, बावजूद इसके अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। बरसात में संपर्क प्रभावित होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ता है।
अब ग्रामीण सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धुरिया नदी पर स्थायी पुल का निर्माण चाहते हैं। उनका सवाल है कि आखिर राजखाड़ के लोगों को पुल के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
संवाददाता – सत्यम शुक्ला की रिपोर्ट





