12 साल की मेहनत के बाद CUSB के प्रोफेसर को मिला भारतीय पेटेंट, नैनो तकनीक में बड़ी उपलब्धि


गया से विज्ञान और शोध के क्षेत्र में बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय यानी सीयूएसबी के रसायन विभाग के प्रोफेसर अमिया प्रियम और उनकी टीम ने नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। करीब 12 वर्षों के निरंतर शोध के बाद उनके आविष्कार को भारतीय पेटेंट मिला है। खास बात यह है कि इस शोध की शुरुआत उस समय हुई थी, जब विश्वविद्यालय किराए के भवन में संचालित होता था और प्रयोगशाला सुविधाएं भी सीमित थीं।


पेटेंट का शीर्षक है—“संवर्धित सौर उत्प्रेरण हेतु प्रथम एवं द्वितीय निकट अवरक्त क्षेत्र में ट्यूनेबल प्लास्मोनिक होलो सिल्वर नैनो शेल्स का शून्य आरपीएम संश्लेषण।” इसका आवेदन वर्ष 2019 में किया गया था। आवेदन संख्या 201931047638 और पेटेंट संख्या 597876 है। वर्ष 2025 में इसका परिणाम जारी हुआ और अगस्त 2026 में विश्वविद्यालय को पेटेंट प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ। इसे सीयूएसबी का नैनो प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पहला भारतीय पेटेंट बताया गया है।

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इस शोध में शोधार्थी भावेश कुमार दाधीच और भुवनेश्वर स्थित कलिंग औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान के डॉ. भव्य भूषण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। शोध को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से अनुदान मिला।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत शून्य आरपीएम आधारित हरित संश्लेषण है। यानी इसके लिए चुंबकीय या यांत्रिक सरगर्मी की जरूरत नहीं पड़ती। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और प्रक्रिया लागत-प्रभावी तथा पर्यावरण-अनुकूल बनती है।

तैयार किए गए खोखले सिल्वर नैनो शेल्स का आकार करीब 40 से 62 नैनोमीटर है। इनमें 1150 नैनोमीटर तक प्रकाश अवशोषण की क्षमता विकसित की गई है, जिससे ये द्वितीय निकट-अवरक्त यानी NIR-II क्षेत्र तक काम कर सकते हैं।

इस तकनीक का इस्तेमाल सौर उत्प्रेरण, हाइड्रोजन उत्पादन और जल शोधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। शोध के अनुसार, यह कपड़ा उद्योग के हानिकारक डाई अपशिष्टों के विघटन में भी प्रभावी है।

प्रोफेसर अमिया प्रियम के मुताबिक NIR-II क्षेत्र में इसकी क्षमता भविष्य में कैंसर की फोटोथर्मल थेरेपी जैसे चिकित्सा अनुप्रयोगों में भी उपयोगी हो सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए शोध, नवाचार और तकनीक के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने की बात कही है।

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